
UP LT Grade Teacher: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने और बीएड की डिग्री को लेकर के इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से बहुत बड़ी अपडेट की गई है , इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया जिसमें एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक पदों पर बिना b.Ed किए अभ्यर्थी की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है। इसका सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ने वाला है जो अभ्यर्थी बिना दीजिए गवर्नमेंट कॉलेज में शिक्षक बनने का राह देख रहे थे।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
उत्तर प्रदेश में एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक के पदों पर भारती के लिए आवेदन फॉर्म भराए जा रहे हैं इसी बीच कंप्यूटर विषय के 1056 पर शामिल थे।
कंप्यूटर विषय की सहायक अध्यापक का फॉर्म भरने के लिए बिना b.Ed किए अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने का मौका मिला था लेकिन याचिका कर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि b.Ed की अनिवार्यता को हटाना शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता है।
कोर्ट का आया फैसला
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं आता है तब तक कोई भी नियुक्ति नहीं की जा सकेगी हालांकि चयन प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है।
अदालत में एनसीटीई की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए बीएड अनिवार्य योग्यता है।
बिना बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर लगी रोक
अदालत का मानना है कि शिक्षा स्तर को बनाए रखने के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता में बदलाव करना सही नहीं है , बिना बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है जब तक की इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं आती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2025 को होगी , इसके बाद b.Ed की अनिवार्यता को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।
अदालत ने मांगा जवाब
अदालत में राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से इस संबंध में जवाब मांगा है और जल्द से जल्द स्थिति साफ करने को कहा है।
सिलेक्शन प्रोसेस फिलहाल जारी रहेगी लेकिन नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है अब देखना यह है कि अगली सुनवाई में अदालत का क्या निर्णय आता है और कौन से अभ्यर्थियों पर इसका असर पड़ेगा।